Saturday, May 18, 2013

Old Amazing Poems

I can't believe now I wrote them.




kOsao kOsao AnauBava idyao tUnao ijandgaI

kOsao kOsao AnauBava idyao tUnao ijandgaI
isarifro Ajagar sao laaogaao ko saaqa
baadlaao sao #vaaba laokr
calao Aayao banaato KUbasaUrt hvaa
AaOr pa ilayao baoisar pOr kI ijandgaI

kOsao kOsao rastao pr Gaumaayaa tUnao ijandgaI
AarjaU ikyaa jaao
]D,anaao kao mana kI
]D,anao calao ptnga saI
calato calao jaha^M laokr gayaI hvaa
AaOr pa gayao ek hlkI ijandgaI


khanaI

vaao Aba khanaI bana gayaI
jaao kla huAa krtI qaI
hr ek puranaI caIja kao
saD, jaanaa caaihyao

Aba vaao vaIranaI hao gayaI
jaao ABaI tk BarI rhtI qaI
hr ek idla kao kuC idna tao
KalaI rhnaa caaihyao  

मेरी आश 

मैं सोचता हूँ ,
मैं रहूँगा हमेशा 
ऐसे ही उदास 
ऐसे ही खिलखिलाता या कहो 
ऐसा ही सर्फिराज 

वक़्त की आंधियां या तो मेरे 
हौसले तोड़ देंगी या फिर 
प्यार की गलियां मेरे लिए 
रास्ता ना देंगी, फिर भी 

कुछ है यहाँ 
मेरे अंदर बैठा हुआ तैयार 
इन उदासियों के काले कीचड़ में 
स्वच्छ पानी की तरह मिला हुआ 
मेरे अंधकार में 
रोशिनी सा घुला हुआ 
हर एक मेरी कमजोरी को थामे 
उस्का मजबूत पह्लु 
उस्के अस्तित्व का अभिन्न हिस्सा 
मेरी आश  


एक विचार 

केवल एक विचार है
शरीर है तो अस्तित्व है
प्यार है घ्रणा है
रिश्तो में बंधा है
अधिकार है

हल्कापन नहीं है
जैसा शरीर के ना होने पर होता
काया है तो रास है
भूख है प्यास है
नींद है आश है
अन्जान है पर बना है

शरीर असुविधा है
भारी तन लेकर चलना पड़ता है
"मैं" है तो भय है
विनती है अहंकार है
अँधेरे में जो पला है
रोशिनी विज्ञान है

मेरी कवितायें 

मेरी कवितायें
मेरे मैं की कहानी हो सक्ती है ।
मेरे सच का बना दर्पण
तुम्हारे सच को दिखा सकती हैं ।

मेरी कवितायें
मेरे सुख दुःख की साथी हो सकती हैं ।
इस घने अनंत में वो सूर्य हो सकती हैं
तुम्हारे दिये में वो बाती हो सकती है।

सोता दिन 

एक सुबह निकली
बिना धूप की ।
ना ही उस्में तेज था
ना थी सोखी
जो सोख सक्ती, मेरे आलस को

और फिर बरसात चली
बिना बूँदों की ।
ना ही उसमें नमी थी
ना ही थी उमंग
जो मस्ती से भर सक्ती, मेरे मन को।

आखिर में बस एक आह निकली
बिना विचारो के  ।
बिना भावो के ।
ना ही उसमे गम था
ना ही थी खुली हँसी
जो कम से कम रोक सक्ती, मेरे सोते दिन को।



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